Logo Text Logo

Prof. Dr. Govind Pandey

137 languages
Article Talk
Read View source View history
From Wikipedia, the free encyclopedia
🔒
"Prof. Dr. Govind Pandey" redirects here. For other uses, see Prof. Dr. Govind Pandey (disambiguation).
Prof. Dr. Govind Pandey
Prof. Dr. Govind Pandey
Prof. Dr. Govind Pandey
Name Prof. Dr. Govind Pandey
Full name Prof. Dr. Govind Pandey
Other names Dr. Govind Pandey Prem; Dr. Govind Prasad Pandey
Nationality Indian
Location Jabalpur, Madhya Pradesh, India
Profession Educationist, Veterinary Scientist, Author, Hindi Litterateur, Advocate, Astrologer
Known for Education, Veterinary Science, Hindi literature, Research, Administration and Astrology
Former position Ex-Registrar & Professor, Nanaji Deshmukh Veterinary Science University, Jabalpur
Academic qualifications 24 degrees, diplomas, honorary doctorates and honorary fellowships
Experience More than 50 years in education, veterinary science, Hindi literature, teaching, research and administration
Research papers About 270 research papers, review articles and abstracts
Books Author of 19 books and editor of 3 books
Awards More than 65 awards, medals, honours and fellowships
Literary works Poems, lyrics, ghazals, dramas, stories and Hindi literary books
Notable listing Included in Marquis Who’s Who in the World, 28th edition, 2011-

प्रो. डॉ. गोविन्द पाण्डेय

प्रो. डॉ. गोविन्द पाण्डेय, जिन्हें डॉ. गोविन्द पाण्डेय प्रेम और डॉ. गोविन्द प्रसाद पाण्डेय के नाम से भी जाना जाता है, भारत के शिक्षाविद्, पशुचिकित्सा वैज्ञानिक, अधिवक्ता, हिन्दी साहित्यकार, गीतकार, लेखक, ज्योतिषाचार्य और समाजसेवी हैं। वे नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के पूर्व कुलसचिव तथा भेषजगुण विज्ञान एवं विष विज्ञान के पूर्व प्राध्यापक, प्रमुख वैज्ञानिक और विभागाध्यक्ष रहे हैं। उनके जीवनवृत्त के अनुसार वे 24 उपाधियों/पत्रोपाधियों/मानद डॉक्टरेट/फेलोशिप्स, 50 वर्षों से अधिक अनुभव, लगभग 270 शोध प्रकाशनों, 19 पुस्तकों और 65 से अधिक पुरस्कारों से जुड़े हैं। उनका नाम Marquis Who’s Who in the World, 2011 में शामिल होने का उल्लेख भी मिलता है।

प्रो. डॉ. गोविन्द पाण्डेय, जिन्हें डॉ. गोविन्द पाण्डेय प्रेम और डॉ. गोविन्द प्रसाद पाण्डेय के नाम से भी जाना जाता है, भारत के एक बहुआयामी शिक्षाविद्, पशुचिकित्सा विशेषज्ञ, पशुचिकित्सा वैज्ञानिक, विधिवेत्ता, हिन्दी साहित्यकार, गीतकार, लेखक, ज्योतिषाचार्य, समाजसेवी और डिजिटल क्रिएटर हैं। उनके संक्षिप्त जीवनवृत्त के अनुसार, उनका कार्यक्षेत्र शिक्षा, पशुचिकित्सा विज्ञान, भेषजगुण विज्ञान एवं विष विज्ञान, हिन्दी साहित्य, शोध, अध्यापन, प्रशासन, ज्योतिष और सामाजिक सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

डॉ. पाण्डेय के जीवनवृत्त में उन्हें “सर्वाधिक शैक्षणिक योग्यता वाले संभवतः मध्यप्रदेश के अकेले व्यक्ति और भारत के एकमात्र शिक्षाविद्, पशुचिकित्सक, पशुचिकित्सा वैज्ञानिक, अधिवक्ता, हिन्दी साहित्यकार, गीतकार, लेखक और ज्योतिषाचार्य” के रूप में वर्णित किया गया है। इसी विवरण के अनुसार वे 24 उपाधियों, पत्रोपाधियों, मानद पी-एच.डी. और मानद फेलोशिप्स से युक्त हैं, जिनमें तीन पारंपरिक पी-एच.डी. — एक पूर्ण और दो अध्ययनरत — तथा चार मानद पी-एच.डी./मानद डॉक्टरेट शामिल हैं।

उनका नाम/जीवनी अमेरिका की प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुस्तक/डायरेक्टरी Marquis Who’s Who in the World के 28वें संस्करण, 2011 में दर्ज होने का उल्लेख उनके CV में किया गया है। उनके प्रोफाइल के बारे में यह भी उल्लेख है कि वे Google, Google Scholar, ResearchGate, LinkedIn, Instagram, Facebook, YouTube और अन्य डिजिटल/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर indexed/available हैं।

प्रारंभिक परिचय और व्यक्तित्व

डॉ. गोविन्द पाण्डेय को उनके उपलब्ध जीवनवृत्त में एक “बहुआयामी व्यक्तित्व” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनका योगदान केवल अकादमिक या वैज्ञानिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने साहित्य, प्रशासन, शोध निर्देशन, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक कार्य, डिजिटल मीडिया और ज्योतिष में भी कार्य किया है। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े कवि, लेखक और कलाकार के रूप में भी उल्लेखित हैं।

उनकी पहचान एक ऐसे विद्वान के रूप में बनती है जिसने शिक्षा, विज्ञान, पशुचिकित्सा, कानून, हिन्दी साहित्य और ज्योतिष जैसे भिन्न क्षेत्रों में औपचारिक अध्ययन और सक्रिय कार्य दोनों किए। उनके जीवनवृत्त में उन्हें राष्ट्र चिंतक, समाजसेवी, सोशल मीडिया/डिजिटल क्रिएटर और अनेक पुस्तकों के लेखक के रूप में भी वर्णित किया गया है।

शिक्षा और शैक्षणिक योग्यताएँ

डॉ. पाण्डेय के जीवनवृत्त के अनुसार उनके पास कुल 24 उपाधियाँ, पत्रोपाधियाँ, मानद पी-एच.डी. और मानद फेलोशिप्स हैं। इनमें पशुचिकित्सा विज्ञान, विधि, प्रबंधन, समाजशास्त्र, हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, ज्योतिष, कम्प्यूटर अनुप्रयोग, आयुर्वेद, साहित्य और शोध-संबंधित फेलोशिप्स शामिल हैं।

उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में BVSc & AH, MVSc & AH, PhD Hon. in Pharmacology, Honorary Doctorate in Veterinary Science & Animal Husbandry, LLB, LLM, MBA, MA in Sociology, MA in Hindi, MA in English, MA in Political Science, Acharya in Jyotish, DPA & LSG, PGDCA, Ayurved Ratna, Sahitya Ratna, FASAW, FSLSc, FISCA, PhD in Law — अध्ययनरत, PhD in Management — अध्ययनरत, Honorary Doctorate in Hindi Literature, Honorary Doctorate in Hindi Literature and Social Work तथा Honorary Doctorate in Education and Hindi Literature शामिल हैं।

रोजगार और अनुभव

डॉ. गोविन्द पाण्डेय को शिक्षा, पशुचिकित्सा, हिन्दी साहित्य, अध्यापन, अनुसंधान और प्रशासन में 50 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाला बताया गया है। उनके करियर में विश्वविद्यालय प्रशासन, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, प्रमुख वैज्ञानिक, वरिष्ठ पशुचिकित्सा शल्यज्ञ और सरकारी प्रशासनिक भूमिकाएँ शामिल रही हैं।

वे नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्यप्रदेश के पूर्व कुलसचिव रहे हैं। इसी विश्वविद्यालय में वे भेषजगुण विज्ञान एवं विष विज्ञान विभाग में पूर्व प्राध्यापक, प्रमुख वैज्ञानिक और विभागाध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

डॉ. पाण्डेय ने आर.पी.एस. कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंसेस, महेन्द्रगढ़, हरियाणा में भेषजगुण विज्ञान एवं विष विज्ञान विभाग के प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे श्री गंगानगर पशुचिकित्सा महाविद्यालय, टांटिया विश्वविद्यालय, श्री गंगानगर, राजस्थान में भी इसी विषय के पूर्व प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष रहे।

इसके अतिरिक्त वे अपोलो कॉलेज ऑफ वेटरिनरी मेडिसिन, जयपुर, राजस्थान, भूमिका कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस एंड रिसर्च सेंटर, महेन्द्रगढ़, हरियाणा, और बी.आर. नाहटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मंदसौर, मध्यप्रदेश में भी प्राध्यापक, विभागाध्यक्ष या प्रमुख वैज्ञानिक के पदों पर कार्यरत रहे।

उन्होंने श्री राम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फार्मेसी, जबलपुर में भेषजगुण विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। सरकारी सेवा में वे मध्यप्रदेश शासन के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग में जनपद पंचायत के पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मध्यप्रदेश शासन में पूर्व वरिष्ठ पशुचिकित्सा शल्यज्ञ रहे।

वैज्ञानिक शोध और अकादमिक योगदान

डॉ. पाण्डेय का वैज्ञानिक शोध योगदान व्यापक बताया गया है। उनके CV के अनुसार लगभग 270 शोध-पत्र, समीक्षात्मक लेख और सारांश-पत्र प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने अनेक शोधार्थियों के निर्देशक, पर्यवेक्षक, सलाहकार और सह-निर्देशक के रूप में कार्य किया तथा कुछ अनुसंधान परियोजनाओं में प्रमुख अन्वेषक और सह-प्रमुख अन्वेषक की भूमिका निभाई।

वे अनेक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में परीक्षक, मूल्यांकनकर्ता और प्रश्न-पत्र-निर्माता के रूप में भी जुड़े रहे। इसी प्रकार अनेक सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यक्रमों और समितियों में उन्होंने अध्यक्ष, निर्णायक, विशेषज्ञ, सलाहकार और समीक्षक के रूप में कार्य किया।

उनके CV में यह भी उल्लेख है कि वे अनेक जर्नल्स, शोध-पत्रों, पत्रिकाओं और पुस्तकों के मुख्य संपादक, संपादक, संपादकीय बोर्ड सदस्य, विशेषज्ञ और समीक्षक रहे हैं।

शोध रैंकिंग और अकादमिक सूचकांक

उपलब्ध जीवनवृत्त के अनुसार, डॉ. पाण्डेय का ResearchGate Research Interest Score 4,425 है। उनके प्रकाशित शोध-पत्रों की citation संख्या 3,140 बताई गई है और research readership संख्या 670,050 दर्ज है। Google Scholar पर उनका h-index 26 बताया गया है। National Academy of Agricultural Sciences के अनुसार उनका NAAS score 240 उल्लेखित है।

पुस्तकें और प्रकाशन

डॉ. पाण्डेय ने लेखक के रूप में कुल 19 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें 14 पुस्तकें शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान से संबंधित तथा 5 पुस्तकें हिन्दी साहित्य से संबंधित हैं। संपादक के रूप में उन्होंने 3 पुस्तकों का संपादन किया है, जिनमें 2 पुस्तकें शिक्षा/विज्ञान/अनुसंधान से संबंधित और 1 पुस्तक हिन्दी साहित्य से संबंधित है।

उनका लेखन विज्ञान, शोध, शिक्षा और साहित्य के बीच एक व्यापक पुल का कार्य करता है। एक ओर उन्होंने पशुचिकित्सा विज्ञान और अकादमिक शोध में योगदान दिया, वहीं दूसरी ओर हिन्दी साहित्य में कविता, गीत, ग़ज़ल, नाटक, कहानी और व्यंग्य जैसी विधाओं में भी लेखन किया।

पुरस्कार, सम्मान और फेलोशिप

डॉ. गोविन्द पाण्डेय को शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, व्यवसाय, हिन्दी साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में 65 से अधिक पुरस्कार, पदक, सम्मान और फेलोशिप्स प्राप्त होने का उल्लेख है। उनके CV के अनुसार उन्हें शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में 3 मानद फेलोशिप्स — FASAW, FSLSc और FISCA प्राप्त हैं।

हिन्दी साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 18 पुरस्कार/सम्मान प्राप्त होने का भी उल्लेख है।

हिन्दी साहित्य में योगदान

डॉ. पाण्डेय का हिन्दी साहित्य में योगदान लगभग 50 वर्षों का बताया गया है। वे हिन्दी साहित्यकार, कवि, गीतकार, लेखक और नाटककार के रूप में सक्रिय रहे हैं। हिन्दी साहित्य में उनके पास MA और 3 मानद डॉक्टरेट/मानद पी-एच.डी. होने का उल्लेख मिलता है।

उन्होंने 150 से अधिक सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यक्रमों और सोशल मीडिया मंचों पर 1500 से अधिक शोध-पत्र, लेख, स्व-रचनाएँ और भाषण प्रस्तुत किए हैं।

हिन्दी साहित्य में वे 5 पुस्तकों के लेखक और 1 पुस्तक के संपादक हैं। उन्होंने स्वलिखित गीतों के 2 ऑडियो कैसेट्स निर्मित और प्रसारित किए। उनकी अनेक कविताएँ, गीत, ग़ज़लें, नाटक और कहानियाँ पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से प्रकाशित या प्रसारित हुईं।

वे विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समितियों, कार्यक्रमों और गतिविधियों में अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, निर्णायक, विशेषज्ञ और अतिथि वक्ता के रूप में भी आमंत्रित होते रहे हैं। वे अनेक पुस्तकों और पत्रिकाओं के मुख्य संपादक, संपादक और संपादकीय बोर्ड सदस्य भी रहे हैं।

हिन्दी साहित्य में प्रकाशित पुस्तकें

डॉ. गोविन्द पाण्डेय की हिन्दी साहित्य में स्वलिखित और प्रकाशित पुस्तकों में “अर्चन” — भजन/भक्ति गीत, 1992; “एहसास” — शायरियाँ, 1992; “तरंग” — गीत/गानें, 1992; “वर्तमान के आर-पार” — कविताएँ, 1992; और “ठहाकों की महफ़िल — हँसी के गोलगप्पे”, 1992 शामिल हैं।

हिन्दी साहित्य में उनकी संपादित और प्रकाशित पुस्तक “मोहन की बकवास” — व्यंग्य, 1992 है।

उनकी प्रकाशनाधीन पुस्तकों में “इस माटी से उपजे गीत” — देशभक्ति गीत और “एहसास की चाँदनी” — ग़ज़ल/हिन्दी ग़ज़ल शामिल हैं।

ऑडियो कैसेट और प्रसारण

डॉ. पाण्डेय के स्वलिखित गीतों पर निर्मित और प्रसारित दो ऑडियो कैसेट्स का उल्लेख मिलता है। इनमें “तरंग” — फिल्मी गानों की तरह गीत, 1993 और “अर्चन” — भजन/भक्ति गानें, 1998 शामिल हैं।

प्रकाशित और प्रसारित रचनाएँ

उनकी प्रकाशित या प्रसारित कविताएँ, गीत, ग़ज़लें, नाटक और कहानियों की कुल संख्या 98 बताई गई है। इनमें 50 कविताएँ, गीत और ग़ज़लें समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं या पुस्तकों में प्रकाशित हुईं। 38 कविताएँ, गीत और ग़ज़लें आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से प्रसारित हुईं, जिनमें से 2 कविताएँ विदेश स्थित Addis Ababa, Ethiopia से प्रसारित होने का उल्लेख है।

उनके 4 नाटक/रेडियो नाटक प्रसारित हुए, जिनमें “काला बाज़ार का मुजरिम” Radio Station Addis Ababa, Ethiopia से, “खींचे रहो पन्नालाल” और “खिल गया चमन” आकाशवाणी जबलपुर से, तथा “अरमान” आकाशवाणी रीवा से प्रसारित हुए।

उनकी 3 कहानियाँ — “बंधन”, “एक तारा एक सुकन्या” और “प्रेम का आँचल” — आकाशवाणी जबलपुर से प्रसारित हुईं। उनके 2 नाटक — “रोजगार दफ़्तर” और “प्रेमदीप” — विभिन्न मंचों पर प्रदर्शित हुए, जिनमें उन्होंने स्वयं कलाकार के रूप में मुख्य भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त उन्होंने दूरदर्शन भोपाल से प्रसारित टेलीफिल्म “दिशा” में कलाकार के रूप में भूमिका निभाई।

ज्योतिष में योगदान

डॉ. पाण्डेय ज्योतिषाचार्य के रूप में भी सक्रिय रहे हैं। उनके CV के अनुसार उन्होंने YouTube, Facebook और Instagram पर 300 से अधिक ज्योतिष-संबंधी वीडियो बनाए और पोस्ट किए, जिन्हें लाखों बार देखा गया। उन्होंने भारत के अनेक लोगों को उनकी कुंडली के आधार पर भविष्यफल बताया है।

हस्तरेखा विशेषज्ञ के रूप में भी उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा, भाग्य रेखा आदि के आधार पर भविष्यफल बताया है।

संगठनात्मक सदस्यता और सार्वजनिक भूमिका

डॉ. पाण्डेय ने 40 से अधिक शैक्षणिक, वैज्ञानिक, व्यावसायिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों, संघों, समितियों और जर्नल्स में आजीवन सदस्य या पदाधिकारी के रूप में कार्य किया है या कर रहे हैं।

विद्यार्थी जीवन में वे कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस एंड एनिमल हसबैंड्री, जबलपुर में NCC Sergeant, Badminton Captain, Literary Secretary और Hostel Prefect रहे। उन्होंने NCC “B” और “C” प्रमाणपत्र उत्तीर्ण किए और अनेक NCC शिविरों में भाग लिया। उन्होंने दो वर्षीय राष्ट्रीय सेवा योजना/NSS course भी पूरा किया और कई NSS शिविरों में भाग लिया।

विरासत और महत्व

प्रो. डॉ. गोविन्द पाण्डेय का व्यक्तित्व एक ऐसे भारतीय विद्वान के रूप में उभरता है जिसने अकादमिक शिक्षा, पशुचिकित्सा विज्ञान, शोध, प्रशासन, कानून, साहित्य और ज्योतिष जैसे विविध क्षेत्रों को समान सक्रियता से साधा। उनकी उपलब्धियों में 50 वर्षों से अधिक का अनुभव, अनेक शैक्षणिक उपाधियाँ, शोध-पत्र, पुस्तकें, पुरस्कार, फेलोशिप, साहित्यिक रचनाएँ, आकाशवाणी-दूरदर्शन प्रसारण, ज्योतिषीय सामग्री और सामाजिक-सांस्कृतिक सहभागिता शामिल है। उपलब्ध जीवनवृत्त के आधार पर वे ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनकी पहचान केवल एक पेशे तक सीमित नहीं है, बल्कि वे शिक्षा, विज्ञान, साहित्य और समाज के अनेक आयामों में सक्रिय रहे हैं।


 

Appearance hide
Text
Width
Color
See also