डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय
भारत के प्रख्यात पत्रकार, साहित्यकार, प्राकृतिक चिकित्सक, समाज चिंतक एवं सामाजिक न्याय के अग्रदूत
भारतीय हिन्दी पत्रकारिता, साहित्य, सामाजिक चेतना और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में यदि उन व्यक्तित्वों की चर्चा की जाए जिन्होंने अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रखकर समाज के बौद्धिक एवं नैतिक उत्थान के लिए समर्पित कर दिया, तो डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय का नाम अत्यंत सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। वे एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपने बहुआयामी जीवन में सरकारी सेवा, पत्रकारिता, साहित्य, प्राकृतिक चिकित्सा, सामाजिक जागरण तथा मानव सेवा के क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देकर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
लगभग तीन दशकों से अधिक समय से हिन्दी पत्रकारिता में सतत लेखन, साहित्यकारों का उत्साहवर्धन, सामाजिक सरोकारों पर निर्भीक अभिव्यक्ति, डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक न्याय एवं समता के मिशन के प्रचार-प्रसार तथा प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण में उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। वे उन विरले साहित्यकारों और पत्रकारों में हैं जिन्होंने कभी प्रसिद्धि को अपना लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि समाज की चेतना को जागृत करना अपना जीवन धर्म माना।
प्रारम्भिक जीवन
डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय का जन्म 1 जनवरी 1948 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक नगर आगरा के बसई खुर्द, ताजगंज में एक साधारण किन्तु संस्कारित परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय श्री तोताराम तथा माता स्वर्गीय श्रीमती भगवान देवी ने उन्हें सत्यनिष्ठा, परिश्रम, अनुशासन, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे जीवन मूल्यों की शिक्षा दी।
बचपन से ही उनमें अध्ययन के प्रति विशेष रुचि, समाज के प्रति संवेदनशीलता तथा लेखन की स्वाभाविक प्रतिभा विद्यमान थी। आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अपने व्यक्तित्व का निर्माण किया। यही संस्कार आगे चलकर उन्हें एक प्रतिष्ठित पत्रकार, साहित्यकार और समाजसेवी के रूप में स्थापित करने का आधार बने।
शिक्षा एवं ज्ञानार्जन
डॉ. जनमेजय ने अपनी उच्च शिक्षा मेरठ विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश से स्नातक स्तर पर पूर्ण की। शिक्षा के प्रति उनकी जिज्ञासा केवल पारंपरिक अध्ययन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने व्यावसायिक दक्षता प्राप्त करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार से वाणिज्यकला (Commercial Art) में अंशकालिक डिप्लोमा भी प्राप्त किया।
ज्ञान के प्रति उनकी सतत जिज्ञासा ने उन्हें स्वास्थ्य विज्ञान की ओर भी प्रेरित किया। मानव जीवन को रोगमुक्त एवं संतुलित बनाने की भावना से उन्होंने गाँधी आश्रम केन्द्र, राजघाट, नई दिल्ली से प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान में डिप्लोमा प्राप्त किया। इस शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व में सेवा, स्वास्थ्य और मानव कल्याण का एक नया आयाम जोड़ दिया।
सरकारी सेवा में उत्कृष्ट योगदान
डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय ने भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डाक विभाग में अत्यंत सम्मानजनक सेवा प्रदान की। वे डाक मुख्यालय, डाक भवन, नई दिल्ली में नक्शानवीस (Cartographer) के पद पर कार्यरत रहे।
सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने अपनी कार्यकुशलता, तकनीकी दक्षता, अनुशासन तथा ईमानदारी से उच्च अधिकारियों एवं सहकर्मियों का विश्वास अर्जित किया। उनका सम्पूर्ण सेवाकाल निष्कलंक, समर्पित एवं अनुकरणीय रहा।
उनकी प्रतिभा केवल भारत तक सीमित नहीं रही। वर्ष 1985-1986 के दौरान उन्हें टी.सी.आई.एल. (Telecommunications Consultants India Limited) में प्रतिनियुक्ति पर सल्तनत ऑफ ओमान (मस्कट) में डिज़ाइनर के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि उनके तकनीकी कौशल तथा उत्कृष्ट कार्यक्षमता का प्रमाण है।
लगभग चार दशकों तक राष्ट्र सेवा करने के पश्चात वे दिसम्बर 2007 में सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।
हिन्दी पत्रकारिता में अमूल्य योगदान
यद्यपि वे सरकारी सेवा में कार्यरत थे, परन्तु उनका वास्तविक झुकाव सदैव साहित्य और पत्रकारिता की ओर रहा।
पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से वे देश के अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी दैनिक समाचार-पत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में "सम्पादक के नाम पत्र" लिखते आ रहे हैं। उनके पत्र केवल प्रतिक्रियाएँ नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक समस्याओं, राष्ट्रीय मुद्दों, शिक्षा, संस्कृति, लोकतंत्र, संविधान, प्रशासन, नैतिकता और जनहित से जुड़े विचारोत्तेजक दस्तावेज़ होते हैं।
उनकी लेखनी तथ्यपूर्ण, तार्किक, संतुलित और सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण होती है। उन्होंने सदैव निष्पक्ष पत्रकारिता, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया।
उनके पत्रों ने अनेक बार सामाजिक समस्याओं की ओर शासन-प्रशासन तथा समाज का ध्यान आकर्षित किया। यही कारण है कि उन्हें हिन्दी पत्रकारिता में एक जागरूक, जिम्मेदार और विचारशील लेखक के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।
साहित्य सेवा और नवोदित लेखकों का मार्गदर्शन
डॉ. जनमेजय केवल स्वयं लेखन तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने अनेक नवोदित साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों तथा लेखकों का व्यक्तिगत पत्राचार के माध्यम से निरंतर उत्साहवर्धन किया।
उनका विश्वास है कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं बल्कि परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने अनेक युवा लेखकों को लेखन जारी रखने, भाषा को समृद्ध बनाने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
उनके इस मौन साहित्यिक योगदान ने हिन्दी साहित्य को अनेक नई प्रतिभाएँ प्रदान की हैं।


प्रकाशित पुस्तक
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके दीर्घ अनुभव और सामाजिक चिंतन का सार उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक
"पत्रकारिता में प्रतिक्रिया : एक पाठक की कलम से (भाग-1)"
में देखने को मिलता है।
यह पुस्तक केवल पत्रों का संग्रह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक पत्रकारिता में जागरूक पाठक की भूमिका का जीवंत दस्तावेज़ है। इसमें समाज, शासन, साहित्य, पत्रकारिता और जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर उनके विचार संग्रहीत हैं।
वर्तमान में वे इस महत्वपूर्ण कृति के द्वितीय भाग के लेखन एवं प्रकाशन की दिशा में कार्यरत हैं।
सामाजिक चेतना एवं मानव सेवा
डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय का सम्पूर्ण जीवन सामाजिक जागरण के लिए समर्पित रहा है।
वे परमपूज्य बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के समता, समानता, शिक्षा, संगठन और संघर्ष के संदेश से अत्यंत प्रभावित रहे हैं। उन्होंने जीवनभर बाबा साहेब के सामाजिक न्याय के मिशन को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया।
वे बुद्ध धम्म से संबंधित विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों में निरंतर सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज में समानता, बंधुत्व, करुणा, संवैधानिक मूल्यों तथा वैज्ञानिक सोच का विकास करना रहा है।
उन्होंने अनेक सामाजिक संगठनों के माध्यम से लोगों को शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, संवैधानिक अधिकारों तथा नैतिक जीवन के प्रति प्रेरित किया।
प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान
डॉ. जनमेजय प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान के समर्थक हैं। उनका मानना है कि स्वस्थ समाज ही समृद्ध राष्ट्र का आधार होता है।
उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा, योग, संतुलित जीवनशैली और नैतिक आचरण को मानव जीवन का अभिन्न अंग माना तथा लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का सतत प्रयास किया।
पत्रकार संगठन में नेतृत्व
वर्तमान समय में डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार महासंघ (पंजीकृत), नई दिल्ली में राष्ट्रीय मंत्री के महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
इस पद पर रहते हुए वे देशभर के स्वतंत्र पत्रकारों के अधिकारों, पत्रकारिता की गरिमा, नैतिक मूल्यों तथा निष्पक्ष मीडिया की स्थापना के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय के बहुआयामी योगदान को देश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं ने समय-समय पर सम्मानित किया है। उन्हें प्राप्त सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके जीवनभर के समर्पण, संघर्ष और उत्कृष्ट कार्यों की सार्वजनिक स्वीकृति हैं।
उन्हें प्राप्त प्रमुख सम्मानों में—
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डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप
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दलित हिन्दी सम्मान
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बाबा साहेब अम्बेडकर साहित्यरत्न पुरस्कार
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समता सैनिक दल सम्मान
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बाबा साहेब अम्बेडकर समाज सेवक पुरस्कार
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बहुजन केसरी सम्मान
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विद्या वाचस्पति सम्मान
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प्रियदर्शी अशोक सम्मान
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कबीर दीप सम्मान
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डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान
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साहित्य सम्राट सम्मान
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कलम कलाधर सम्मान
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प्रज्ञा भारती सम्मान
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राष्ट्रभाषा आचार्य सम्मान
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देश सेवक सम्मान
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राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान
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ब्रज गौरव सम्मान
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रंजन कलश शिव सम्मान
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हिन्दी गौरव सम्मान
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राष्ट्र-भूषण सम्मान
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साहित्य श्री सम्मान
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राष्ट्र गौरव सम्मान
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राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान
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गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता रत्न सम्मान
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ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड (2019)
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लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2022)
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भारत गौरव सम्मान (2023)
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विश्व हिन्दी गौरव सम्मान (2023)
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साहित्य गौरव सम्मान (2024)
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अटल बिहारी वाजपेयी जन्मशताब्दी सम्मान (2024)
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साहित्य सेवी सम्मान (2025)
जैसे अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान शामिल हैं।
व्यक्तित्व
डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय का व्यक्तित्व सादगी, विनम्रता, विद्वता, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का अद्भुत संगम है। वे मानते हैं कि "कलम केवल विचार लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का भविष्य गढ़ने का सबसे शक्तिशाली साधन है।"
उन्होंने अपने जीवन में कभी पद, प्रतिष्ठा या पुरस्कारों को लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि समाज की सेवा, जागरूकता और साहित्य के माध्यम से राष्ट्र निर्माण को अपना सर्वोच्च कर्तव्य माना।
प्रेरणादायी विरासत
डॉ. जसवन्त सिंह जनमेजय उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने सरकारी सेवा की जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करते हुए साहित्य, पत्रकारिता, प्राकृतिक चिकित्सा, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों की सेवा को समान महत्व दिया। उनका सम्पूर्ण जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ संकल्प, सत्यनिष्ठा और समाज के प्रति समर्पण हो, तो वह बिना किसी प्रचार के भी लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
आज वे केवल एक लेखक, पत्रकार या समाजसेवी नहीं, बल्कि हिन्दी भाषा, लोकतांत्रिक पत्रकारिता, सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, सेवा, संघर्ष, सत्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण का एक उज्ज्वल आदर्श है।
उनकी लेखनी ने समाज को विचार दिए, उनकी पत्रकारिता ने जनमत को दिशा दी, उनके साहित्य ने हिन्दी भाषा को समृद्ध किया, उनकी सामाजिक सक्रियता ने समानता और न्याय का संदेश दिया तथा उनकी मानवीय दृष्टि ने उन्हें भारत के सम्मानित साहित्यकारों, पत्रकारों और समाज सुधारकों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया। उनका जीवन वास्तव में ज्ञान, सेवा, साहित्य, सत्य और मानवता को समर्पित एक प्रेरणादायक यात्रा है।














































































